Gold Price में भारी उठापटक: 2 फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट और भविष्य की संभावनाएं

Gold price ने वर्ष 2026 की शुरुआत में ही ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू लिया है, जिससे यह निवेशकों और आम जनता के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, 2 फरवरी 2026 को बाजार में भारी गिरावट (Crash) देखी गई, लेकिन इसके पीछे की लंबी अवधि की तेजी (Bull Run) के कारण बेहद गहरे और संरचनात्मक हैं। क्या आप जानते हैं कि सोने के भाव 5,600 डॉलर प्रति औंस के पार क्यों चले गए थे? इस विशेष रिपोर्ट में हम उन सभी कारणों का विश्लेषण करेंगे जो gold price को प्रभावित कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय बजट और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने सोने की चमक को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गिरावट केवल एक ‘करेक्शन’ है, और gold price की यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्यों सोना इतना महंगा हो रहा है।
2026 में Gold Price बढ़ने के 5 मुख्य कारण
सोने की कीमतों में आई यह तेजी कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आर्थिक और राजनीतिक कारण मौजूद हैं।
1. सेंट्रल बैंकों द्वारा रिकॉर्ड खरीदारी
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेष रूप से चीन और अन्य ब्रिक्स (BRICS) देश, अपनी मुद्रा के भंडार में विविधता लाने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। Reuters की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025-26 में सेंट्रल बैंकों की खरीदारी ने gold price को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। वे डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं, जिससे सोने की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
2. केविन वॉर्श और फेडरल रिजर्व का निर्णय
2 फरवरी 2026 को gold price में आई गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व का अगला अध्यक्ष नामित करना है। वॉर्श को ‘महंगाई के प्रति सख्त’ (Inflation Hawk) माना जाता है। निवेशकों को डर है कि वे ब्याज दरों में कटौती को रोक सकते हैं। ऊँची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक होती हैं, जिससे gold price पर अस्थायी दबाव बना है।
3. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension)
वर्ष 2026 में अमेरिका-ईरान तनाव और यूरोप के साथ व्यापार युद्ध (Trade War) की आशंकाओं ने निवेशकों को ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर धकेला है। जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, gold price में तेजी आती है क्योंकि निवेशक शेयर बाजार के जोखिम से बचने के लिए सोने का सहारा लेते हैं।
“सोना केवल एक धातु नहीं है, यह अनिश्चित समय में सुरक्षा की गारंटी है। 2026 की भू-राजनीतिक अस्थिरता ने इसे और सिद्ध कर दिया है।”
4. डॉलर का उतार-चढ़ाव
सोने की कीमत और अमेरिकी डॉलर में विपरीत संबंध होता है। 2026 की शुरुआत में डॉलर में कमजोरी देखी गई थी, जिससे gold price ने नए रिकॉर्ड बनाए। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में डॉलर में थोड़ी मजबूती आई है, जिससे कीमतों में हल्का सुधार (Correction) देखने को मिला है।
5. भारतीय बजट 2026 का प्रभाव
भारत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 के बाद घरेलू बाजार में भी हलचल मची है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के कैपिटल गेन्स टैक्स नियमों में बदलाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके बावजूद, शादियों के सीजन और त्योहारों की मांग के कारण भारत में भौतिक सोने की मांग बनी हुई है, जो लंबी अवधि में gold price को सहारा देगी।
Gold Price का वर्तमान हाल: 2 फरवरी 2026 का अपडेट
आज के बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो gold price में एक तेज गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में मुनाफावसूली (Profit Booking) हावी रही।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार: सोने का भाव अपने शिखर $5,600 से गिरकर $4,600-$4,800 प्रति औंस की रेंज में आ गया है।
- भारतीय बाजार: 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,44,000 से ₹1,51,000 प्रति 10 ग्राम के बीच चल रहा है।
- सिल्वर: चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है, जो सोने के साथ-साथ नीचे फिसली है।
यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक अवसर हो सकती है जो उच्च gold price के कारण बाजार में प्रवेश नहीं कर पाए थे। विशेषज्ञ इसे बाजार का एक स्वस्थ सुधार मान रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं: क्या Gold Price ₹1,60,000 के पार जाएगा?
बाजार विशेषज्ञों और जेपी मॉर्गन (JPMorgan) जैसे संस्थानों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक है। JPMorgan ने अनुमान लगाया है कि 2026 के अंत तक gold price $6,300 प्रति औंस तक पहुंच सकता है। यदि यह भविष्यवाणी सच होती है, तो भारतीय रुपयों में सोने की कीमत ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम को भी पार कर सकती है।
इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी मंदी के खतरों से पूरी तरह बाहर नहीं आई है। जैसे ही फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का संकेत देगा, gold price में फिर से एक नई रैली शुरू होने की प्रबल संभावना है।
निवेशकों के लिए सलाह
मौजूदा समय में gold price में अस्थिरता को देखते हुए, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
- SIP का उपयोग करें: एक मुश्त निवेश करने के बजाय, गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करें।
- लंबी अवधि का नजरिया: सोने में निवेश हमेशा लंबी अवधि (3-5 साल) के लिए करना चाहिए।
- पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन: अपने कुल निवेश का 10-15% हिस्सा ही सोने में रखें।
अधिक जानकारी के लिए आप World Gold Council की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहां वैश्विक रुझानों का विस्तृत डेटा उपलब्ध है।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, gold price में 2026 की तेजी के पीछे मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता हैं। हालांकि 2 फरवरी को कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन बाजार का बुनियादी ढांचा अभी भी मजबूत है। निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि gold price केवल एक संख्या नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत का बैरोमीटर है। आने वाले महीनों में, फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना अनिवार्य होगा क्योंकि यही कारक सोने की अगली चाल तय करेंगे।