Nipah virus outbreak in India ने एक बार फिर देश और विदेश में चिंता की लहर दौड़ दी है। फरवरी 2026 की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में दो नए मामलों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। यह खबर न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे एशिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है, क्योंकि पड़ोसी देशों ने भी अपनी सीमाओं पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी है।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में दो स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने की खबर ने चिकित्सा जगत को चौंका दिया है। Nipah virus outbreak in India की यह घटना सर्दियों के मौसम में आई है, जो खजूर के गुड़ (Date Palm Sap) के सेवन से सीधे जुड़ी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस स्थिति पर अपनी नजर बनाए रखी है और इसे ‘मध्यम जोखिम’ की श्रेणी में रखा है।
पश्चिम बंगाल में ताजा स्थिति: एक नजर (Current Situation)

जनवरी के अंत और फरवरी 2026 की शुरुआत में, पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दोनों संक्रमित व्यक्ति स्वास्थ्य कर्मी (Healthcare Workers) हैं। इससे अस्पताल के भीतर संक्रमण फैलने (Human-to-Human Transmission) का डर पैदा हो गया है, जो इस वायरस को और भी खतरनाक बनाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, एक मरीज वेंटिलेटर पर है जबकि दूसरे की हालत में सुधार देखा गया है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 196 से अधिक संपर्कों (Contacts) को ट्रेस किया और उनका परीक्षण किया, जो राहत की बात है कि अभी तक निगेटिव आए हैं। फिर भी, nipah virus outbreak in India का यह नया रूप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
यह पश्चिम बंगाल में निपाह का तीसरा बड़ा प्रकोप है; इससे पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नादिया में मामले देखे गए थे। इस बार का संक्रमण विशेष रूप से सर्दियों के दौरान खजूर के रस के सेवन से जुड़ा माना जा रहा है, जो चमगादड़ों द्वारा दूषित हो सकता है।
Nipah virus outbreak in India: क्यों है यह इतना जानलेवा? (Why is it Deadly?)
निपाह वायरस (NiV) एक ज़ूनोटिक वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसकी मृत्यु दर (Fatality Rate) 40% से 75% के बीच होती है, जो इसे कोविड-19 की तुलना में कहीं अधिक घातक बनाती है। इस वायरस का कोई भी प्रमाणित टीका (Vaccine) या सटीक इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है।
संक्रमण के मुख्य लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, लेकिन यह तेजी से गंभीर एन्सेफलाइटिस (दिमागी सूजन) में बदल सकता है। Nipah virus outbreak in India के दौरान देखे गए लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और मानसिक भ्रम शामिल हैं। गंभीर मामलों में, मरीज 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है।
- तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द।
- सांस लेने में कठिनाई या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस।
- चक्कर आना, उनींदापन और मानसिक संतुलन बिगड़ना।
- गंभीर मामलों में दौरे पड़ना और कोमा।
संक्रमण के कारण और फैलाव (Transmission & Risks)
निपाह वायरस का मुख्य वाहक फ्रूट बैट (Fruit Bat) या ‘फ्लाइंग फॉक्स’ प्रजाति का चमगादड़ है। भारत में, विशेषकर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से सटे इलाकों में, सर्दियों में खजूर का कच्चा रस (Raw Date Palm Sap) पीने की परंपरा है। यह रस अक्सर रात में पेड़ों पर लटके बर्तनों में इकट्ठा किया जाता है, जिसे चमगादड़ दूषित कर देते हैं।
जब कोई व्यक्ति यह दूषित रस पीता है, तो वह संक्रमित हो जाता है। इसके अलावा, संक्रमित सूअरों या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैल सकती है। वर्तमान nipah virus outbreak in India में, मानव-से-मानव संक्रमण का खतरा भी देखा गया है, खासकर अस्पतालों में जहाँ मरीज की देखभाल के दौरान शारीरिक द्रवों (Body Fluids) के संपर्क से वायरस फैल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस हवा के जरिए बहुत दूर तक नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब रहने पर खतरा बना रहता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट (PPE Kits) और कड़े संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी गई है।
एशिया में हाई अलर्ट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया (Global Alert)
भारत में निपाह के मामलों ने पड़ोसी देशों को भी सतर्क कर दिया है। थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और नेपाल ने अपनी सीमाओं और हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग प्रक्रिया कड़ी कर दी है। World Health Organization (WHO) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हालांकि अभी वैश्विक जोखिम कम है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
न्यूज़ीलैंड और यूके जैसे देशों ने भारत की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दर्शाती है कि nipah virus outbreak in India को वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय कितनी गंभीरता से ले रहा है।
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर एक केंद्रीय दल भेजा है। यह दल कंटेनमेंट ज़ोन बनाने, सर्विलांस बढ़ाने और संदिग्ध मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग करने में मदद कर रहा है।
Nipah virus outbreak in India बचाव और सावधानियां: क्या करें और क्या न करें (Prevention)
चूंकि निपाह वायरस का कोई इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि खजूर के कच्चे रस का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें, या उसे उबाल कर ही पियें।
इसके अलावा, जमीन पर गिरे हुए फलों को खाने से बचें, क्योंकि वे चमगादड़ों द्वारा कुतरे हुए हो सकते हैं। Nipah virus outbreak in India के इस दौर में निम्नलिखित सावधानियां बरतना अनिवार्य है:
- मास्क पहनें: भीड़भाड़ वाले इलाकों और अस्पतालों में मास्क का प्रयोग करें।
- हाथ धोएं: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं, विशेषकर जानवरों को छूने के बाद।
- कच्चा रस न पियें: खजूर या ताड़ के कच्चे रस (Neera) का सेवन न करें।
- बीमार जानवरों से दूर रहें: सूअरों और चमगादड़ों के संपर्क से बचें।
- फलों को धोकर खाएं: फलों को अच्छी तरह से धोकर और छीलकर ही खाएं।
भारत में निपाह का इतिहास और भविष्य की चुनौतियां
भारत में निपाह वायरस का इतिहास पुराना और डरावना रहा है। पश्चिम बंगाल के अलावा, केरल राज्य ने 2018, 2021 और 2023 में कई प्रकोप झेले हैं। केरल में निपाह के मामले अक्सर मानसून (मई-जून या सितंबर) के दौरान आते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में यह सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) में खजूर के रस के मौसम के साथ मेल खाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और जानवरों के प्राकृतिक आवास में इंसानी दखल के कारण ऐसे ज़ूनोटिक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। Khabar News India पर हम लगातार आपको ऐसी स्वास्थ्य आपदाओं के प्रति जागरूक करते रहते हैं। भविष्य में ऐसी महामारियों से बचने के लिए ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ देखा जाता है।
वर्तमान nipah virus outbreak in India हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ होने की आवश्यकता है। ग्रामीण इलाकों में सर्विलांस और टेस्टिंग सुविधाओं को बढ़ाना होगा ताकि शुरुआती दौर में ही प्रकोप को रोका जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में, घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। निपाह वायरस बेहद खतरनाक है, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से हम इससे बच सकते हैं। पश्चिम बंगाल में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग अपना काम कर रहे हैं, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
अगर आप या आपके परिवार में किसी को बुखार के साथ दिमागी परेशानी के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। Nipah virus outbreak in India से जुड़ी हर अपडेट के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों और सरकारी एडवाइजरी का पालन करें। अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
अधिक जानकारी और स्वास्थ्य समाचारों के लिए BBC News India और NCDC India की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।